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https://subhashsinghai.blogspot.com/बुक चित्र पर क्लिक करें हिंदी छंद माला ,भाग 4

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अनुक्रमण 93 - रासावलय छंद  94 - महामंगलावती छंद 95. लीलाधिका छंद 96 कर्पूर छंद 97 बीथी छंद  98- विभूति छंद 99 उज्ज्वल छंद  100 महालक्ष्मी छंद 101 पाइता छंद  102 ताटंक कुकुभ छंद में चंदेली बुंदेली इतिहास  103 इंदिरा (, कनक मंजरी) छंद  104 विजया( मनोरमा )छंद  105 दीर्घ कंचन लेखा छंद 106 हेमंत छंद  ~~~~~~~~~~~~~~~~ 93 रासावलय_छंद ( 21 मात्रिक ,  सममात्रिक चतुष्पदी छंद है ) #विधान- षटकल - चौकल , ‌ षटकल_ पंचकल. =(21 मात्रा) पदांत पंचकल - रगण 212 या यगण- 122‌ (वाचिक कर सकते हैं ) #दोनों_षटकलों पर #यति_आभाष आवश्यक व विशेषता है, क्योंकि #षटकल इस छंद में #वलय  हैं ,  जो  #स्वतंत्र दिखने चाहिए  |  जैसे -👇 करते यात्रा हैं     ❎  करते हैं यात्रा  ✅ लिखना सबको है ❎. लिखना है सबको ✅  मेरा  जाना  रहे ❎.  जाना ही मम रहे ✅  नहीं सोचते हैं ❎ नहीं सोच रखते ✅ शारद माता हैं  ❎ शारद हैं माता ✅ ~~~~~   कानन जाते रहे ❎ कानन में जा रहे ✅ अर्थात-#शब्द को तोड़कर वर्ण इधर उ...

https://subhashsinghai.blogspot.com/बुक चित्र पर क्लिक करें , बुंदेली बाँसुरी (बुंदेली दोहें )

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जय माँ शारदे मैया मोरी  शारदे ,  देती   रऔ.   प्रकाश | इतइँ  लिखूँ दोहावली , नौनीं   रचूँ  'सुभाष' || लिखी "बराई" "बाँसुरी"  , "कुंड"  "दीप"  हैं  नाम | दोहावली "सुभाष" से   , माँ   को  किया  प्रणाम  || हैं  माता  आशीष   से,     दोहे   पाँच    हजार || पाँच  खंड  जिसके बने ,    मानूँ   माँ  उपकार || ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ बुंदेली विषय‌- पुटैया  ( पोटली) करम पुटैया  बाँदियौ  , पाप  पुन्य खौं देख | ऊपर बारौ है तकत ,लिखत भाग्य कौ लेख ||  ग्यान पुटैया जो दिखा  करतइ है    बतकाव | ऊकै  मन कै ताड़  लौ ,  पैलउँ कैसे   भाव || बँदी  पुटैया  देख कैं , सब जानत   हैं  माल | खुली तकैं चुटयात सब, जैसे  भाजी  दाल  || बँदी    पुटैया    रात  खौं , दद्दा  चा...