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सृजन सरोवर स्थापना वर्ष - 20 अप्रैल 2018
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सम्पादक मंडल
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1. सम्पादकीय
सृजन सरोवर की निर्झर ई पत्रिका प्रकाशित है , सभी सक्रिय मित्रों की भागीदारी समाहित की गई है , सृजन जो समाहित किया गया है , हो सकता है किसी की रचना में त्रुटि हो , तब आप परिमार्जित भाव से पढ़े |
इस पत्रिका को आप ,अपने अँगूठे से बहुत स्पीड से पृष्ठ आगे - पीछे कर सकते है , यह पत्रिका निम्न जगह भी अपलोड है
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भविष्य में भी हम शीघ्र ही पत्रिका प्रकाशित करेगें , बस आपकी पटल पर सक्रियता व दूसरो की रचनाओं पर प्रोत्साहन चाहिए | हम आपके विगत - पुराने अच्छे सृजन भी चयन करते रहेगें , जैसा कि अभी भी किया है | पर किसी पटल के चरण पूर्ति , शब्द पूर्ति सृजन इस पटल पर मत करें , जिससे भविष्य की पत्रिका हेतु हम आपका चयन संकलित करते रहें |
हम भविष्य में चाहते है कि इस मंच के माध्यम से व इसके सह पटल " छंद महल " के माघ्यम से आपकी रचनाएँ गूगल पर सदैव के लिए अंकित हो जावें | और हम वर्तमान टेक्नालाँजी का उपयोग करके आपके सृजन को नमन करके गूगल पर अपलोड कर रहे है |
चूकिं हम चरण पूर्ति , शब्द पूर्ति , विषय पूर्ति से दूर रहते है ,कवि के निजी भावों को नमन करते हैं , अत: ऐसे पटलों पर प्रस्तुत किए सृजन , इस पटल पर न डालें , और न हम पर लांंछन आने दे कि अमुक पटल का आयोजित सृजन आपके यहाँ पत्रिका में या पटल पर शामिल है | 🙏 आगे से भी पूर्ति चरण न डाले , जिससे हम आगे भी निकलने बाली पत्रिका में उन्हें चयन कर सकें
सादर
सम्पादक मंडल
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2--प्रेरणा पुंज -साकेतबासी हमारे
आदरणीय राजकुमार गिरि "निर्झर "जी
( सृजन सरोवर में अध्यक्ष कार्यकाल 28 मई 2020 से 30 नवम्बर 2021 ) आपने अपने कार्यकाल में सृजन सरोवर को बहुत ऊँचाई प्रदान की है ) जिसको हम सभी उनको प्रेरक पुंज मानकर यथावत कार्य कर रहे है |
सादर शत -शत नमन आदरणीय निर्झर जी को |
💐साकेत धाम गमन - 30 नवम्बर 21 💐 तीस नवम्बर दिन रहा , चले गए प्रभु धाम |
लेकिन निर्झर हम सदा , अमर रखेगें नाम ||
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1 सम्पादकीय , 2 हमारे निर्झर जी ,
3 अनुक्रमणिका , 4 शारदे वंदना
5 - सुभाष सिघई. 6. धर्मपाल धर्म जी
7 - बलबीर सिंह वर्मा जी , 8 राकेश कुमार जैनबंधु जी
9- मनोज पुरोहित जी 10 अनिल कुमार यादव जी
11 श्यामराव धर्मपुरीकर जी , 12 हिम्मत चोरड़िया जी
13 - सर्वानंद सिंह पथिक जी 14 अशोक माही जी
15 - रामसुधार प्रजापति " सिफर"
16 - रजनी गुप्ता पूनम 17 - अशोक गिरि जी 18 - कवि महावीर शर्मा "सरस "
19 सुरेशचन्द्र जोशी, 20- पंकज शर्मा तरुण
21 -सुधा बसोर गाजियाबाद. 22- महेश चंद्र शुक्ल (शिक्षक ) 23 आर के प्रजापति "साथी" जी
24 वर्तिका अग्रवाल. 25 धनंजय प्रसाद यादव जी
26-गीतकार जगदीश तिवारी उदयपुर
27 ब्रह्मनाथ पाण्डेय' मधुर'.
28 सुनीता सिंह सरोवर. 29. मनोज द्विवेदी 30 - महेश भटनागर. 31 - नरसिंह नवल 32 हरीश बिष्ट "शतदल". 33 होशियार सिंह यादव. 34. तेजपाल शर्मा 35 - स्नेह प्रभा पाण्डेय.
36- ज्ञान प्रकाश दुुवे 37 - अरविंद कुमार मिश्र उर्वार
38 ओंकार सिंह चौहान. 39 विनोद शर्मा पिपरिया
40 कृष्ण मोहन अंभोज. 41 रंजना वर्मा उन्मुक्त
42 महेश बीसौरिया डबरा 43 शशी किरन श्रीवास्तव , 44 - आशाराम वर्मा नादान 45 महासिंह ठाकुर
46 - डाॅ0राधेश्याम जांगिड़ 47 जगत भूषण राज
48 - शंभू सिंह रघुवंशी अजेय. 49 - सुकृति श्रीवास्तव
50 डा० मंजू यादव 51 - गिरधारी लाल मीणा
52 - रामदिल कण्डारा , 53 लल्ला सुरेन्द्र सिंह चौरसिया 'लल्लन मुनि". 54 डा.अमरसिंह सैनी 'श्रीमाली'.
55 -नीरज कुमार पाठक.
56 सुशील सरना 57 रामानंद राव लखनऊ
58 सच्चिदानंद तिवारी 59 मदन लाल गुर्जर 'सरल'
60 डॉ. कमलेश उपन्या. 61 बिनोदा नंद झा 'बेगाना'
62 सुरेन्द्र कौशिक 63- शकीलअहमद अंसारी
64 - मंजु मित्तल मंजुल. 65.सुधा शर्मा राजिम
66 पूनम सिन्हा "प्रीत". 67 स्वर्ण लता सोन
68- विनीता कुशवाहा 69 रंजना झा नेपाल
70. सरला भंसाली 71 किरनप्रभा अग्रहरि
72 देवेन्द्र शर्मा भ्रमर . 73 माहिर निज़ामी
74 जयप्रकाश मिश्र . 75 राजकुमार चौहान.शिवपुरी
76 छोटे लाल शुक्ल शील. जौनपुरिया, 77 गोकुल प्रसाद यादव कर्मयोगी जी , 78 कवि संतकुमार सारथि
79 मीनाक्षी दीक्षित , 80- हर्षलता दुधोड़िया
81 - कृष्णकुमार मिश्र किशन ,82 हरीश सेन
83 रोशनी पोखरियाल , 84 पुष्पा पाण्डेय
85 डा० अतिराज सिंह 86 जदुवीर सिंह राठौर जलज
87 विभा वर्मा वाची , 88 डा०एन एल शर्मा निर्भ़य
89. श्याम पाण्डेय 90 रजिंदर महाजन
91 - संदीप सिंह. 92 गिरधारी लाल चौहान
93 - प्रमिला श्री तिवारी , 94 बीरेन्द्र पाण्डेय भिटौली
95 सीमा पाण्डेय मिश्रा 96 कन्हैयालाल लाल वर्मा
97 कुवेर माली , 98 ओम प्रकाश श्रीवास्तव ओम ,
99- अनामिका वैश्य आईना , 100 शोभा प्रसाद
101- डा० शिशुपाल , 102 कुसुम अग्रवाल
103 - वेनीराम कनस्वाल , 104 भाष्कर बुढ़ाकोटी निर्झर
105 श्यामनिवास सिंगार ,106 प्रीता झा " पृशा"
107 ललिता सेंगर , 108 कृष्ण गोपाल किशन
109 - डा० आदेशकुमार पंकज ,110 जयश्रीकांत जय
111- सूरजमल मियाड़ा , 112 नन्हें सिंह ठाकुर दमोह
113 भूप राना 114 जयकृष्ण पाण्डेय कोविद
115- तरुण रस्तोगी "कलमकार"
116 जयवीर सिंह अत्री 117 आर वी सुमन ,
118 राकेश रतन बीसलपुरी
119 कृष्ण मुरारीलाल मधुकर ,
120 कैलाश वशिष्ठ रतलाम
121 कमल किशोर " कमल " 122- कुमार सुरेंद्र शर्मा सागर 123 सूर्यकांत गुप्ता 124- कपिल बैशाखिया
125 - कौशल कुमार पाण्डेय आस जी
126 रुपेन्द्र सिंह गौर , 127 गजेेन्द्र सिंह हमीरपुर
128 सुनील शर्मा " आकाश " 129 संतोषी देवी
130 सुरेश मंडल , 131 किरण बी चौबे अविरत
132 सम्पत डागा सिवाकाशी 133 निशि अग्रवाल
134 डा० रश्मि अग्रवाल 'रत्न' ,
135 ~गौतम बोहरा 136 मुकेश गुप्ता
137 जबरा राम कंडारा , 138. राजवीर सिंह तरंग
139. धर्मात्माप्रसाद गुप्त अभिलाषी ,
140 - अमर सिंह राय (शिक्षक) 141 -मुरारी स्वामी
142 -हरिमोहन शर्मा , 143 अशोक पटसारिया नादान
144 सत्य प्रकाश शर्मा सत्य 145 उमेश चन्द्र चन्दर पावटा
146 डा० पुृष्पा सिंह , 147 डा० रमेश खटकड़ "रामा"
148 चितरसिंह ' चितर' 149 मीना श्री
150 राजीव नामदेव ' राना लिधौरी'
151 कृष्णकुमार पाण्डेय शिक्षक, 152 विद्या जया शर्मा
153 अनामिका कली ,154 विमलेश चंद्र दीक्षित " विमल "
पृष्ठांत - अध्यक्षीय आभार (धर्मपाल धर्म जी)
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सुभाष सिंघई
दोहा
नहीं दिखावा में पड़े , रखे न मन में मान |
संत सदा समभाव से, देता सबको ज्ञान ||
जहाँ दिखावा चल रहा , खुले एक दिन पोल |
भूसा का बोरा सदा , ले जाता है झोल ||
नहीं दिखावा चल सके , दिख जाती है फाड़ |
दौड़ लगाती लोमड़ी , सुनकर. शेर दहाड़ ||
सुभाष सिंघई
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धर्मपाल धर्म जी
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ बलबीर सिंह वर्मा "वागीश"
हिंदी से होगी सदा, हिन्द देश की शान।
पढ़ें-लिखें हिंदी सभी, और करें सम्मान।।
बेटी घर की शान है, महके आँगन द्वार।
बहन बिना फीका लगे, राखी का त्योहार।।
राकेश कुमार जैनबंधु जी
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मनोज पुरोहित जी
कुंडलियां
आया मौसम #शीत का,कंबल रखो सँभाल।
वरना होगा आपका, बद से बदतर हाल।
बद से बदतर हाल, हड्डियाँ ठिठुराएँगी।
राम नाम है सत्य,यही दुनिया गाएँगी।
सावधान इंसान,निरोगी होगी काया।
पाए लंबी उम्र, समझ यह जिसके आया।
मनोज कुमार पुरोहित
अलीपुरद्वार, पश्चिम बंगाल
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ अनिल कुमार यादव जी
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11 - श्यामराव धर्मपुरीकर
तम से तुम डरना नहीं, करो सदा संघर्ष ।
अरुणोदय के बाद ही, रवि पाता उत्कर्ष ।।
मुक्तक आधार छंद- ' हरिगीतिका छंद '
मापनी- 2122 2122 2122 2122
समांत- ' आर ', पदांत- ' हो तुम ' .
गीत गाऊँ आज जिसके, प्रीत का आगार हो तुम ।
चाँदनी में झिलमिलाता, वह धवल शृंगार हो तुम ।
जी रहा जिसके लिए मैं, मीत तुम धड़कन हमारी -
नित निहारूँ इस हृदय में,जिंदगी का प्यार हो तुम ।
श्यामराव धर्मपुरीकर गंज बासौदा
भाग-दौड़ यह जिंदगी, भागें सब दिन-रात ।
तब सबको खाने मिले, अपना-अपना भात ।।
वही सुखी संसार में, जिसके मन संतोष ।
काम करे वह अनवरत, कभी न करता रोष ।।
मानव-तन हमको मिला, प्रभु प्रदत्त उपहार ।
भवसागर यह पार हो, कर ले प्रभु से प्यार ।।
जीवन भर हमने किया, केवल यहाँ हिसाब ।
कभी न खोला पृष्ठ यह, पढ़ते प्रेम किताब ।।
धरती सुंदर यह बने, सबके मन हो नेह ।
सारा जग सबको लगे, जैसे अपना गेह ।।
पेड़ लगाओ अब सभी, तधी बुझेगी प्यास ।
हरी-भरी हो यह धरा, शुद्ध हवा लो श्वान ।।
- श्यामराव धर्मपुरीकर गंजबासौदा,विदिशा म.प्र.
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12 - हिम्मत चोरड़िया प्रज्ञा
सृजन किया पाषाण से, देख राम थे दंग।
वानर सेना साथ में, जागी नई उमंग।।
भक्त और भगवान को, अलग कभी मत मान।
सदा विराजे वे हृदय, मन्दिर उसको जान।।
हरिगीतिका छंद (१४,१४ पर यति)मुक्तक
दुख से मुझे माँ तार दे, नैया हमारी पार कर।
है कौन अब मेरा यहाँ, संसार से उद्धार कर।
'हिम्मत' सदा संगीत हो, माँ मुझे वरदान दो-
कल्याण जग का कर सकूँ, अब माँ यही उपकार कर।
हिम्मत चोरड़़िया प्रज्ञा
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13 -सर्वानन्द सिंह "पथिक"
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14 अशोक माही
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15- रामसुधार प्रजापति सिफ़र
गंदा मुख मत कीजिए, अपशब्दों से आप।
अगर कहीं गलती हुई, करिए पश्चाताप।।
रामसुधार प्रजापति "सिफर "
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16 रजनी गुप्ता पूनम चंद्रिका जी
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17 अशोक गिरि जी
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18 - कवि महावीर शर्मा " सरस " पावटा( जयपुर )
जरा-जरा सी बात पर, दाँतों को मत भींच।
रिश्तों की इस बेल को, स्नेह त्याग से सींच।।
अनेकता में एकता, हिन्दी की है शान।
हिन्दी तुलसी जायसी,हिन्दी है रसखान।।
करे मनुज जो पालना, जीवन में कर्तव्य।
सचमुच बनता है सदा, जीवन उसका भव्य।।
नाजुक होता है सदा,रिश्तों का संसार।
भ्रातृ-बहन के प्रेम की,बहती रहे बयार।
कवि महावीर शर्मा " सरस " पावटा ( जयपुर )
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19- सुरेशचन्द्र जोशी,
आँधी कुछ ऐसी चली, लगा भयानक रोग।
शहर पलायन कर रहे, गाँवों से अब लोग।|
सुरेशचन्द्र जोशी,
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सुर में सुर जब भी मिले,बजे साथ में साज।
गीत अगर सुर में सजे , लगे मधुर आवाज।।
जूते महँगे पड़ रहे, सस्ता है सर ताज।
राजा को हैं कोसते,बजा- बजा कर साज।।
पंकज शर्मा "तरुण "
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21 सुधा बसोर सौम्या
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ 22 महेश चंद्र शुक्ल (शिक्षक )
मौत एक विश्राम है,जीवन का अवसान।
कुछ ऐसा कर जाइए,बनी रहे पहचान।।
महेश चन्द्र शुक्ल (शिक्षक)
आर के प्रजापति "साथी" जी जतारा
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24 वर्तिका अग्रवाल
पद्मनाभ,क्रतु,श्रीरमण ,अगणित हैं हरि नाम।
विश्वंभर, मधुरिपु हृदय, करता सदा प्रणाम।।
विधा - भ्रमर मात्रिक छंद आधारित मुक्तक
विधान - ११/१६ पर यति। यति के दोनों तरफ त्रिकल शब्द अनिवार्य, चरणान्त गाल
दर्प करे जब वास , सर्प सम शब्दों में फुंकार।
दंभ बोलता बोल, अचंभित हो देखे संसार।
इंद्रदेव का जाल, करे वश चंचल मन ही नित्य-
काम ,क्रोध ,मद ,लोभ, दर्प रोके जाने से पार।
व्यर्थ कलम वो लिखे नहीं जो ,दामोदर के नाम को ।
शुद्ध नहीं वो भक्ति रहे जो ,निंदा सँग हरि धाम को ।
देखा करते मायापति जग, तारे पावन आत्मा ..
तन-मन से जो निर्मल-पंकज ,पा लेता श्री राम को।।
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26 गीतकार जगदीश तिवारी उदयपुर
छन्दों के दरबार में, भर कुछ ऐसा रंग।
फागुन ख़ुद नाचे यहाँ, बजा बजा कर चंग।।
कच्चे धागों से बंधा, राखी का त्यौहार।
मोल नहीं अनमोल है, जाने सब संसार।।
गीतकार जगदीश तिवारी उदयपुर
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27 -ब्रह्मनाथ पाण्डेय' मधुर'
मन लम्पट बनकर भ्रमर, देख फूल का ठौर।
आकर्षित हो चल पड़े,छोड़ स्वयं का पौर।।
जिसने रावण बन किया, सीता पर अन्याय||
अंत काल वह हो गया, उस जैसा असहाय||
28 -सुनीता सिंह सरोवर
माता रानी आ रही, आया दिन अब खास |
पलक पांवड़े हैं बिछे, लगी द्वार पे आस ||
सावन सूखा ही गया, हुई नहीं बरसात |
काले मेघ कुॅंवार के, बरस रहे दिन-रात ||
30-महेश भटनागर. जयपुर
गायें आज पुकारती,कहाँ कृष्ण की प्रीत ।
रोग शोक से त्रस्त हूँ, पीर हरो मनमीत।।
कृष्ण रूप की मोहिनी,बंसी की यह तान ।
मुग्ध हुआ मन बावरा,भूल गया पहचान ।।
जीवन आंगन राम मय, बसें हृदय घनश्याम ।
सत्य तत्व की खोज में,स्वयं बनें अभिराम ।।
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31 -नरसिंह नवल।
वंदन पूजन कर सभी,करो मात सत्कार।
माता आईं द्वार पर, यह उनका आभार।।
मातृभूमि हित जो लड़े,किए लहू अभिषेक।
विरले सुत वे भारती, हैं लाखों में एक।।
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32 -हरीश बिष्ट "शतदल"
ज्ञानी अपने ज्ञान का , करते नहीं बखान |
सहज,सरल, मृदुभाष बन, देते सबको ज्ञान ||
घर-घर में है मातु का, सजा हुआ दरबार |
भक्तों के सपने सभी, करती है साकार ||
रखें हौसला बाँधकर, पड़ें नहीं कमजोर |
ढलती जाएगी निशा, आएगी नव भोर ||
हरीश बिष्ट "शतदल"
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मन से हार न मानिये, मेहनत से लो काम।
बिन श्रम के इंसान भी, हो जाता बदनाम।।
हार जीत सम मानते, मेहनतकश इंसान।
करते डरकर काम जो, कायर की पहचान।।
34 -तेजपाल शर्मा
लगा कलंक न छूटता, कोटिक करें प्रयत्न।
कब से इसको ढो रहा, चंद्र सरिस जो रत्न।।
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35 स्नेह प्रभा पाण्डेय
रूप लिए कात्यायनी,आई माता आज।
करें भक्त पूजन सभी,आगे बढ़े समाज।।
स्वतंत्रता की आग में,झुलसे कितने लोग।
याद करें उस मर्म को,सहते गए वियोग।।
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36 ज्ञान प्रकाश द्विवेदी
भाग्य भरोसे बैठ कर , पढ़े न विधना लेख ।
कर्म करें आगे बढ़ें , जीवन अनुभव देख ।।
समय कभी होता भला , होता कभी खराब ।
चुप हो केवल देखिए , विधि का जरा हिसाब ।।
ज्ञान प्रकाश दुवे
नमन सृजन सरोवर मंच
कुण्डलिया
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भारत प्यारा देश है , हम इसकी संतान ।
इसकी रक्षा मे लगे , फौजी सभी जवान ।।
फौजी सभी जवान , देश की रक्षा करते ।
सीमा पर तैनात , रात दिन जीते मरते ।।
निडर बहादुर शेर, शत्रु को खूब पछारत ।
विजयी होगा देश , हमारा प्यारा भारत ।।
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@ ज्ञान प्रकाश द्विवेदी
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37 - अरविंद कुमार मिश्र उर्वार
विद्या फलती फूलती, सदा विनय के डाल।
उसको जो भी साध लें, उनका चमके भाल।।
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38 ओंकार सिंह चौहान
महंगाई नित बढ़ रही , सरकारें हैं मौन l
पीड़ित जनता देश की ,उत्तरदायी कौन ll
हिंदी का सम्मान हो , हिंदी का यशगान l
हिंदी ही भाषा रहे , हिंदी ही पहचान ll
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विनोद शर्मा
कपटी छल करते सदा,करते घात फरेब।
कभी काट देते गला,कभी काटते जेब।।
जब तक मन में आपके,बसा हुआ है पाप।
तब तक व्यर्थ उपासना,व्यर्थ मंत्र का जाप।।
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40 कृष्ण मोहन अंभोज
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41 रंजना वर्मा उन्मुक्त
माता के हर रूप से, हर्षित है संसार ।
करने जग कल्याण माँ, लेती है अवतार।
कर्मभूमि संसार की,कूटनीति का जाल।
पूजा होती कर्म की,चलते फिर भी चाल।।
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42 महेश बीसौरिया डबरा
43 शशी किरन श्रीवास्तव
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आतुरता में ही मिटे ,बना बनाया काम।
कभी हथेली पर नहीं, उगता देखा आम।।
44 आशाराम वर्मा "नादान " पृथ्वीपुर
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ 45 महासिंह ठाकुर
छोड़ सभी बकवास को,अंतस से हो मौन।
पूछो अपने आप से, आखिर मैं हूँ कौन।।
रिश्तों का विस्तार तो, मतलब का संसार।
जिससे जितना सिद्ध हो,उतना उससे प्यार।।
मेरे अंदर कुछ नहीं, करे कौनअभिमान।
चला उसे जब देखने,सब कुछ अंतर्धान।।
नदी पार होगी नहीं, नदी किनारे बैठ।
जाना है उस पार तो, करो नदी में पैठ।।
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46- डाॅ0राधेश्याम जांगिड़
"ज्ञान अकेला कब जले,बनकर उज्ज्वल दीप।
बिना नेह-बाती लगे,जैसे लुटा महीप।।"
-डाॅ0राधेश्याम जांगिड़
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47 -जगत भूषण राज
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48- शंभू सिंह रघुवंशी अजेय
कितना भी गोरा रहे,कोई भी इंसान।
परछाई लेकिन सदा,होगी काली जान।।
मुक्तक 16-14
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जो हो गया सो हो गया अब, हमें मलाल नहीं करना।
सब कुछ प्रभु के हाथ रहे तो,बिल्कुल ख्याल नहीं रखना।
धर्म कर्म करते रहना है,चाहे जो परिणाम मिले,
जीवन अपना कैसे गुजरे,सुख दुःख आह नहीं भरना।
शंभू सिंह रघुवंशी अजेय
=============================== 51 गिरधारी लाल मीणा
श्राद्ध पक्ष अब आ गया , खिला रहे सब भोज ।
लेते आशीर्वाद जन , पितरों का दिन रोज ।।
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52 - रामदिल कण्डारा नलका बारां
सावन सूखा रह गया, बरसा भादों मास।
कुछ के चेहरे खिल रहे, कुछ हैं लोग उदास ॥
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53 लल्ला सुरेन्द्र सिंह चौरसिया'लल्लन मुनि'
सादा, सहज, सुबोध रख, अद्भुत भव्य चरित्र।
बालक - वृद्ध - जवान सब, सुंदर जीवन चित्र।।
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54 डा.अमरसिंह सैनी 'श्रीमाली'
इज्जत निज घर की सदा,रखना मनुज सँभाल।
मौका ढूंढे दुष्ट जन, पगड़ी रहे उछाल।।
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55 -नीरज कुमार पाठक
नयन तुम्हारे मद भरे, चला रहे हैं बाण।
ऐसे मत देखो मुझे ,दहशत में हैं प्राण।।
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56- सुशील सरना
भूख न जाने भोर को, भूख न जाने शाम।
जीवन भर थमता नहीं, रोटी का संग्राम ।।
बहना भेजे डाक से, भाई को सन्देश ।
राखी भैया बाँधना, मैं बैठी परदेश ।।
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57- रामानन्द राव"
अपनों से ही आस है,अपनों पर विश्वास।
बुरे समय में काम दें, जो अपने हैं खास।।
विधा- कुंडलिया
धरती पर सब कुछ मिले,--नर्क यहीं पर स्वर्ग।
परहित की हो भावना,-----मन में हो उत्सर्ग।।
मन में हो उत्सर्ग,------धूप में तरुवर जलता।
फिर भी देता छाँव,पथिक को उसे न खलता।।
नदिया देती नीर,--किसी से कभी न शडरती।
ऐसा मनुज स्वभाव,---हँसे फिर पावन धरती।।
"रामानन्द राव" इन्दिरा नगर लखनऊ।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~58 सच्चिदानंद तिवारी
सही राह पर हम चलें, रखकर मन में आस।
गलत फैसले से बचें, होगा तभी विकास।।
सच्चिदानंद तिवारी
समय सदा होता नहीं, जीवन में अनुकूल।
कभी- कभी मिलता हमें, पुष्प संग में शूल।।
सच्चिदानंद तिवारी
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59- मदन लाल गुर्जर 'सरल'
बस इतनी - सी आरजू , ऐ मेरे मनमीत।
जब तक तन में जान हो, खूब निभाना प्रीत।।
मदनलाल गुर्जर सरल
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60- डॉ. कमलेश उपन्या.
हिम्मत - तरकश में रखो , कोशिश के सब तीर ।
हार नहीं मानो कभी , हरे जीत सब पीर ।।
सदगुरु होता पेड़ सम , ज्ञान छाँह भरपूर ।
ठंडक ऐसी फैलती , सारी जड़ता दूर ।।
ढली शाम की लालिमा , देती है संदेश ।
खुशियों का घेरा मिले ,बदले हर परिवेश ।।
मधुर प्रेम का पर्व है , छिपा सूत्र में प्यार ।
कच्चे धागे हों भले , पक्का है इकरार ।।
बिनोदा नंद झा ( बिनोद बेगाना)
मिले शक्ति सद् ज्ञान से,धन से सुख परिधान।
उत्तम चाल-चरित्र से,मिले सदा सम्मान।
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सुरेन्द्र कौशिक गाजियाबाद
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ 63- शकीलअहमद अंसारी
मानव-जीवन में मधुर,वाणी का है मोल।
उर पर शाश्वत राज हो,शहद सरिस यदि बोल।
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64 - मंजु मित्तल मंजुल
गुरुवर के आशीष से,बदली जीवन चाल।
अब मुझको बिल्कुल नहीं,डरा सकेगा काल।।
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65. सुधा शर्मा राजिम
आत्म -शुद्धि हो तप मनन ,ज्ञान योग हो ध्यान।
मन- संयम हो सर्वदा , सरल- हृदय पहचान।
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66 पूनम सिन्हा "प्रीत"
पूजन वंदन हम करें,जिनका आदि न अंत।
क्षीर समंदर को मथे,पाएं देव अनंत।।
छाई नभ में लालिमा, हुई सुहानी भोर।
कृषक चला है खेत को,पंछी नभ की ओर।।
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विचलित मत होना कभी,समय अगर प्रतिकूल।
धीरज धरने से सभी,हो जाते अनुकूल।।
स्वर्णलता सोन
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दुनिया के रसरंग में, खोया है संसार।
पता नहीं उसको यहां,क्या जीवन आधार।
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69 रंजना झा
:साक्षरता अभियान को, चलो बढाएँ दूत।
शिक्षित हो सब ही तभी, राष्ट्र बने मजबूत।|
रहे सहोदर शान से, जब तक है मार्तण्ड।
बहनों की रक्षा करे,रिपुओं को दे दण्ड।
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मुक्तक - 16 , 11 ( निर्झर जी को समर्पित )
पाल पोस कर बड़ा किया था, बच्चों सा था प्यार।
बड़े जतन से इसे सँभाला, था उनका संसार।
एक एक को चुनकर देते, समुचित वह ईनाम-
निर्झर जी का प्यारा सपना, आज हुआ साकार।
रंजना झा
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70. सरला भंसाली
पथ दर्शक जब गुरु मिले, कट जाए सब पाप।
जीवन अनुभव शुभ बने, शुद्ध बनोगे आप।।
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71 किरनप्रभा अग्रहरि
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72 देवेन्द्र शर्मा भ्रमर
जंग जीतनी है अगर, करें वार पर वार ।
दुष्मन की ललकार से, कभी न मानें हार ।।
श्वाँस गयी लौटी नहीं, हुई हृदय में पीर ।
आँखों के ही सामने, मिट्टी हुआ शरीर ।।
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73 माहिर निज़ामी ( मुक्तक)
लफ़्ज़ों को तलवार करोगे।
तुम भी क्या क्या यार करोगे।
सब के सब मक्कार यहां हैं।
किस किस पर यलगार करोगे।।
माया ममता मोह अब,हावी सब पर यार।
माया के आगे हुए, रिश्ते सब बेकार।।
-74- जयप्रकाश मिश्र
उलझी सुविधा शुल्क में, मजलूमों की जेब।
अब आफिस की कुर्सियाँ, करतीं रोज फरेब।।
अधरों पर मुस्कान है,आँखों में है प्रीत।
जब से देखा मैं तुम्हें, गूँजे मन में गीत।।
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75 राजकुमार चौहान. शिवपुरी मप्र
राम राम सबसे कहो, मैटो मन संताप।
शीतलता उर में बसे,कटें जनम के पाप।।
सूरत से मुझको नहीं, सीरत से है प्यार।
थोड़ी प्रभु शालीनता, देना मुझे उधार।|
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76 छोटे लाल शुक्ल शील. जौनपुरिया
जीवन में आराधना,प्रीत सरिस है डोर।
बँधी रहे प्रभु से सदा, मिलता निश्चित छोर।।
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77 ~गोकुल प्रसाद यादव कर्मयोगी जी
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~~~~~~~~~~~~~~~`~~~~~~~~~~~~~ 79 मीनाक्षी दीक्षित
भारत देश महान है, विश्व विजय सम्मान।
उच्च तिरंगा देश का, मजबूती पहचान।।
सुख साधन सम्पन्नता, स्वागत बुद्धि- विवेक।
कर्मकुशल कौशल सृजन,लेखन होता नेक।।
सरस्वती की साधना, कलम चले दिन-रैन।
भक्तिभाव की भव्यता, लेखन में ही चैन।।
हे माता शारद नमन, गणपति-गौर सुजान।
शब्द-अर्थ की साधना, लेखन का विज्ञान।।
✍मीनाक्षी दीक्षित भोपाल मध्यप्रदेश
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80 हर्षलता दुधोड़िया
पवन गगन सागर नदी, गुरुवर भू का रूप।
तू ध्रुव तारा चंद्रमा, तू ही मद्धम धूप।।
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81 कृष्ण कुमार मिश्र किशन
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ 82 हरीश सेन
रक्षाबंधन पर्व है, मधुर भाव उल्लास ।
लाता सावन मास में,यह रिश्तों को पास ।
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83 रोशनी पोखरियाल
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ 84 पुष्पा पाण्डेय
एक वचन उपहार में, मुझको दे दो भ्रात।
निर्भयता से जी सके, रिपु से मिले निजात।।
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85 डा०अतिराज सिंह जी
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86 जदुवीर सिंह राठौर जलज जी
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87 विभा वर्मा जी वाची
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88 डा० एन एल शर्मा निर्भय जी
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89 श्याम चन्द्र पाण्डेय
रूपवान जोड़ी भले, धन - सम्पत्ति अथाह।
शक का यदि दीमक लगे, होता गेह तबाह
90 रजिंदर महाजन
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92 गिरधारीलाल चौहान व्याख्याता जी
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बीरेन्द्र पाण्डेय भटौली
निर्धन -निर्बल का कभी, मत करना उपहास।
समय बड़ा बलवान है, मानव उसका दास।
बीरेंद्र पाण्डेय
सीमा पाण्डेेय मिश्रा जी
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कन्हैया लाल वर्मा जी
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कुवेर माली जी
ओम प्रकाश श्रीवास्तव ओम
नवल कोपलें भर गयीं,पक्षी गाते गीत।
हरियाली लगती मधुर,बढ़ते उर में मीत।।
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- शोभा प्रसाद
हिंदी भाषा का यहाँ , वैज्ञानिक आधार ।
बता गए हैं पाणिनी , कंठ जीभ उच्चार ।।
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बेलीराम कनस्वाल
हिंदी भाषा है बड़ी, मीठी सरस सुबोध।
मान मिले समुचित इसे, सबसे है अनुरोध।।
गुरु बिन जीवन में कभी, फलित न कोई काम।
परमेश्वर तुम बिन नहीं ,तुमको प्रथम प्रणाम।।
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-भाष्कर बुड़ाकोटी 'निर्झर'
करे मार्गदर्शन सतत, दे जीवन में प्यार |
ऐसे जन का कीजिए, नित मन से आभार ||
सज्जन-दुर्जन में दिखे, नित वाणी का फेर |
करे एक संतुष्ट जन, दूजा मन को ढ़ेर ||
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💫 श्यामनिवास सिंगार
छठा रूप कात्यायनी, दर्शन दो माँ आप।
जग में तेरी हो कृपा, करो दूर संताप।।
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106 - प्रीता झा'पृशा'
107 डा.ललिता सेंगर
कर्मवीर के मार्ग में, आए यदि व्यवधान।
वह अपने श्रम-शौर्य से,करता शीघ्र निदान।|
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डा० आदेश कुमार पंकज
बीती बातों से दुखी,क्यों होते हो मीत ।
पाना यदि आनंद है,करो कर्म से प्रीत ।।
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जयश्रीकांत जय
ग्वाल बाल साथी सखा, बचपन के सब मीत।
साथ समय के छूटते , मानो जग की रीत।।
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अंक 2 माह नवम्बर 2022 पृष्ठ क्र० 111
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114 जयकृष्ण पाण्डेय कोविद
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ 115 तरुण रस्तोगी " कलमकार "
पावन राखी पर्व पर, देता हूँ उपहार।
अगर जान देनी पड़ी, दूंगा तुझपर वार।
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119 कृष्ण मुरारीलाल मधुकर
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कैलाश वशिष्ठ रतलाम
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122- कुमार सुरेंद्र शर्मा सागर
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125 कौशल कुमार पाण्डेय आस
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127 गजेेन्द्र सिंह हमीरपुर
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128 सुनील शर्मा " आकाश "
कुण्डलिया
कच्चे फल को तोड़ना, उचित नहीं यमराज।
पत्नी बच्चे रो रहे,सारा दुखी समाज।।
सारा दुखी समाज,मौत उसकी आने से।
बिखर गया परिवार, प्रमुख नर के जाने से।।
व्यथित भूमि आकाश,विकल बंदे सब सच्चे।
गिरे धरा पर टूट,विटप से फल जब कच्चे।। (1)
जाना सबको एक दिन,तज कर यह संसार।
देह मिली भगवान से,हमको मित्र उधार।।
हमको मित्र उधार,मिली गिनती की सांसे।
खाली होते कोष,मौत आती बिन खांसे।।
कहता कवि "आकाश",छोड़ना पड़े ठिकाना।
सतत चले यह चक्र,धरा पर आना जाना।।(2)
गहरी निद्रा में पड़ी, भारत की सरकार।
आक्रोशित अतिशय दुखी, शिक्षित बेरुजगार।।
शिक्षित बेरुजगार,खा रहे दर दर ठोकर।
परेशान हैरान, दिखाएं किसको रोकर।।
सुने सियासी बीन, बने औरों हित बहरी।
जब जब आते वोट, नींद टूटे तब गहरी।।(3)
सुनील आकाश शर्मा
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130 सुरेश मंडल
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131 किरण बी चौबे अविरत
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132 सम्पत डागा सिवाकाशी
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134 डा० रश्मि अग्रवाल ' रत्न'
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तीन दोहे
शिक्षा पर व्यय बढ़ रहा, ज्यों पांचाली चीर।
जनता इसका क्या करे,खो देती है धीर।
आधी दुनियां आज भी, सहती है अपमान।
उसे झगड़ना पड़ रहा, पाने को पहचान।
बचपन की यादें मुझे,आती है हर रोज।
बीते लम्हों की यहां,कब से करता खोज।
गौतम बोहरा
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139. धर्मात्माप्रसाद गुप्त अभिलाषी
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ 140 -अमर सिंह राय ( शिक्षक ) नौगाँव
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ 141 -मुरारी स्वामी
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142 -हरिमोहन शर्मा
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143 अशोक पटसारिया नादान
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144 सत्य प्रकाश शर्मा सत्य
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145 उमेश चन्द्र चन्दर
कर न सकोगे तुम सहन,जो होगा संताप।
भाले से मत सेंकिए,अब तो बाटी आप।।
✍️ उमेश चन्द्र 'चन्दर'पावटा,जयपुर
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147 डा० रमेश खटकड़ "रामा" ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
ज्ञानी करते है नहीं, अपना आप बखान।
अपने करमो से सदा,बनती हैं पहचान।।
लगती बेटी बोझ सी, बेटा लगे महान।
जिस घर में बेटी नहीं, वह घर नरक समान।।
जात पात को भूल कर, रखे सदा सद भाव।
नर सेवा से तैरती , जीवन रूपी नाव।।
पितु मां की अवहेलना, और गैर को मान।
ऐसे नर से दूर ही, रखे सदा भगवान।।
प्रतिभा बैठी रो रही, शिखर चढ़े गुणहीन।
गुणी तड़फता काम को, जैसे जल बिन मीन।।
भगवन के अनुराग से, नहीं बिगड़ते काम।
भिलनी की थी आस्था, पहुंचे घर पर राम।।
रिश्ते उसके ही बचे, धन है जिसके पास।
निर्धन का कोई नहीं, करें चितर अहसास।।
गाय कही पलती नही, कुक्कुर पले अनेक।
समझें मां यदि गाय को, कटे नहीं फिर एक।।
मंदिर मस्जिद में हुई,दौलत ही आधार।
कैसे जोड़े आस्था, निर्धन है लाचार।।
कावड़ लाने मैं चला,लेकर सबको साथ।
मन की आशा पूर्ण कर, हे श्री भोलेनाथ।।
अद्भुत रूपा सुंदरी, चपल नयन चित चोर।
खड़ी अकेली बाग में, निरखे मेरी ओर।।
बारिश रिमझिम हो रही,बादल करते शोर।
सावन में सजनी बिना,मन में उठे हिलोर।।
चितर सिंह "चितर"
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150 राजीव नामदेव ' राना लिधौरी'
*राना_बालक_जब_ रहा "*
राना बालक जब रहा , सदा रहा निष्काम |
अब जीवन में ख्वायशें , लूट रहीं आराम ||
*2*
राना बालक जब रहा , अद्भुत रही उमंग |
अब जीवन की दौड़ में , मजबूरी के रंग ||
*3*
राना बालक जब रहा , आया नहीं मलाल |
अब ख्यालों में पालता , बेमतलब जंजाल ||
*4
राना बालक जब रहा, हँसता बनकर फूल |
आज बना काँटा स्वयं , ताने रखे त्रिशूल ||
*5*
राना बालक जब रहा, डर से था मैं दूर |
डर तो अब दर पर रहे , रहता हूँ मजबूर ||
*© राजीव नामदेव "राना लिधौरी" टीकमगढ़*
संपादक "आकांक्षा" पत्रिका
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151 कृष्णकुमार पाण्डेय शिक्षक
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छीन झपट कर खा रहे,भरा न फिर भी पेट।
बनकर के अति आलसी, रहता दिन भर लेट।।
श्री हरि की जब हो कृपा, पूरण होते काम।
अगर न पूरण हो सके, भज पावन हरी नाम।।
सुन्दर नेक विचार हों ,और हृदय प्रभु नाम ।
काम सभी होते सफल,झंझट मिटें तमाम।।
आश निराशा मिट गई,मनवा बेपरवाह।
जिसे नहीं कुछ चाहिए, वही आज है शाह।।
रक्त बीज करने लगे, जगह जगह उत्पात।
हे मां आप विदारिये,करो तीव्र आघात।।
विद्या जया शर्मा
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154 विमलेश चंद्र दीक्षित " विमल "
नहीं भरोसा स्वयं पर, रिक्त ज्ञान का कोष।
ऐसे प्राणी अन्य पर, मढ़ते रहते दोष।।
कौन करे इस जगत में, औरों की परवाह।
शांति और सद्भाव से, ढूंढ़ो अपनी राह।।
देखा इस संसार में, उल्टा सब व्यवहार।
नैन लड़ें पर जानिए , ,सदा उपजता प्यार।।
------- विमलेश चन्द्र दीक्षित 'विमल'
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पृष्ठांत
🌹जय माँ वीणापाणि🌹
सबसे पहले तो मंच के संरक्षक आदरणीय सुभाष सिंघई सर के अथाह श्रम को नमन करते हुए आभार प्रकट करता हूं,जिन्होंने निरंतर निस्वार्थ भाव से हम सभी की रचनाओं को पिरो कर एक "निर्झर ई पत्रिका" के रूप में सुन्दर द्वितीय अंक सृजन माला तैयार की,यह पत्रिका एक अनूठा व बेमिसाल संग्रह है,जिसकी जितनी तारीफ की जाए कम है।
रही मंच की दिनोदिन प्रगति की बात तो इसका श्रेय मंच के सभी पदाधिकारियों सहित सम्मानित रचनाकारों को जाता है।
जहां रचनाकार अपनी कलम के द्वारा मंच को सजाते हैं वहीं पदाधिकारीगण उसे सुव्यवस्थित संग्रह करके समय समय पर रचनाओं को सम्मानित करते हैं।
निस्वार्थ भाव से सभी पदाधिकारी निरंतर मुझसे व आदरणीय सुभाष सिंघई सर जी से (फोन कॉल द्वारा) संपर्क में रहते हैं,फिर चाहे रचनाओं के चयन की बात हो,रचनाओं के भाव ,कथ्य,विधान या अन्य विषय पर हमेशा आपसी चर्चा जारी रहती है।
मैं वाकई इनके उत्साह का कायल हूं,जिन्होंने इस पटल को एक नई ऊंचाई प्रदान की है।
जिसमें श्री बलबीर सिंह वर्मा वागीश जी,श्री मनोज कुमार पुरोहित नागौरी जी,श्री राकेश कुमार जैनबंधु जी,श्री सर्वानंद सिंह पथिक जी,आदरणीया हिम्मत चौरडिया प्रज्ञा जी व श्री अनिल कुमार यादव जी का विशेष योगदान रहा है,साथ ही श्री श्यामराव धर्मपुरीकर जी,श्री राम सुधार प्रजापति जी,श्री अशोक कुमार गिरि जी,श्री अशोक माहेश्वरी जी व आदरणीया रजनी गुप्ता जी का भी सहकार और मार्गदर्शन मिलता रहा है।
मैं पुनः आप सभी का हृदय से आभार प्रकट करता हूं और आशा करता हूं कि इसी प्रकार आप सभी निरंतर इस मंच को प्रगति के शिखर पर ले जाने का प्रयास करते रहेंगे।
मंच के संरक्षक श्री सुभाष सिंघई जी को सादर प्रणाम सहित सेवार्थ
आपका अपना
धर्मपाल धर्म
अध्यक्ष(सृजन सरोवर मंच)
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