मूँछ मुच्छड़ पुराण https://subhashsinghai.blogspot.com/बुक चित्र पर डबल क्लिक करें , बुक खुल जाएगी ,


मुच्छड़   ऐसा   मानते , मूँछ   मर्द की शान |
भिन्न रखें आकार कुछ , दें अपनी  पहचान ||1

कुछ रखते हैं मूँछ का , पूरे  मन  से  ख्याल |
हाथ   लगाकर   ऐंठते ,चलते हाथी   चाल || 2

मूँछ देखकर नाक  भी , होती  सदा  प्रसन्न |
रक्षक अपना मानती , कहती   हम   है टन्न || 3

पतली   मोटी  मूँछ   रख , देते   हैं आकार |
रखें नुकीली  लोग भी , जैसे   हो   तलवार || 4

झगड़ा झंझट हो जहाँ , दें  मूँछों  को  भाव  | 
दुश्मन भी जाता सहम , देख मूँछ का ताव ||5

करते  ऊँची  मूँछ भी ,जब मिलती  है जीत | 
चार लोग सम्मान में   ,  आकर करें  प्रणीत  || 6

मुच्छड़ कहते   हैं कभी , यहाँ  मूँछ  का बाल |
कीमत रखता लाख यह , रत्न समझता लाल || 7

पहलवान भी   मूँछ   से , पहले   देता  ताल | 
कुश्ती जीते तानता ,    पुन:   मूँछ   के बाल ||8

मूँछ नहीं तो कुछ नहीं , मिल जाता है ज्ञान |
इससे बढ़कर मूँछ का , और कहाँ सम्मान ||9 ?

मानव तन में शान की ,  मूँछें   बनी  प्रतीक |
इस पर अच्छे कथ्य हैं , लगते सभी सटीक || 10

मूँछ मुड़ानें की  कहें   , जहाँ  शर्त की  बात |
मूँछ  लड़ाई भी सुनी , जब चल उठती घात || 11

रौब जमाते मूँछ से , करते  कुछ   विस्तार | 
कहते यह संसार  में ,   मर्दो   का  शृंगार || 12

मान मिला जो मूँछ को , बैसा है  किस ओर |
मुख मंडल की शान यह , मानें  इसका जोर ||13

बाल बहुत रखता वदन , पर मूँछों के बाल |
बेशकीमती सब रहें , कीमत  में हर   हाल ||14

दुश्मन से भी बोलते , मत  करना  तू  बात  |
मेरी  मूँछों  सम   नहीं , तेरी कुछ औकात ||15

रखो  मूँछ की शान सब , अच्छा रखो चरित्र |
मूँछें  चमके  आपकी , जैसे   खिलता    इत्र ||16

इज्जत रखते  मूँछ की , सभी   जानते   धर्म |
इसीलिए मुच्छड़ करें , सोच  समझकर कर्म ||17

बिना  मूँछ   का आदमी ,क्या   जानेगा  शर्म  | 
मूँछें    देतीं     ताजगी ,  नहीं  जानता  मर्म ||18

बिना मूँछ का नर यहाँ , बिना   पूँछ का ढ़ोर |
यह दोनों  कब जानते , इज्जत है किस ओर  || 19

बहुत  कहानी   है  पढ़ी , जहाँ  मूँछ के बाल |
दिखला आए शौर्यता , जिसमें  दिखा कमाल ||20

खिल भी जाती मूँछ है , जब  आती   मुस्कान |
लिखकर मूँछ पुराण ही , आया मुझको ज्ञान ||21

मूँछें  रखकर   देखिए ,   जानो  जरा   प्रताप |
मुच्छड़ के   सम्मान  से   , हर्षित  होगें आप || 22

मूँछ कटाना पाप है, जिस दिन किया विचार | 
उस दिन जानो आप है ,     मर्दो  के  सरदार || 23

मूँछ     देखकर  नारियाँ  , देती   हैं   बहुमान |
आदर  सँग सत्कार दें   , अपना   घूँघट  तान ||24

जब तक जिंदा है पिता , हिंदू   रीति  रिवाज |
नहीं मुड़ाते   मूँछ को , जाने   सकल समाज || 25

बाबा दादा  सुत पिता , दिखें   मूँछ  के चित्र  |
मुच्छड़ यह परिवार है , कहते मिलकर मित्र ||26 

मूँछें  बढ़ती   गाल तक , आगे  बँधती कान | 
बुक गिनीज में दर्ज का , मिल जाता सम्मान || 27

एक विनय सबसे करुँ , यदि हो उचित सलाह |
मुच्छड़ हो  हर आदमी , कहे  लोग वश वाह ||🙏28

मूँछ  हमारी   शान   हो , मूँछ   बने   पहचान |
मुच्छड़ घोषित हो दिवस , अपने    हिंदुस्तान ||🤑29

मूँछ  चिन्ह ध्वज में  बने,   लहराए  आकाश |
कायरता  आए   नहीं   ,    रहे शौर्य आभाष || 🤔30

मुच्छड़ श्री   सम्मान का , होवें   शुभ   आरंभ |
किसी तरह वश मूँछ का , बना रहे अब  दम्भ ||🤓31

मूँछकटे  है   मुँछकटा ,    हो  ऐसा  फरमान | 
नाक कटा   ज्यों  नककटे ,  कहलाते  इंसान || 🤓32

राजा -महराजा   हुए ,  चित्र   देखिए  आप |
सबने अपनी मूँछ का , उच्च  रखा  है  माप ||33🙋

मुच्छड़ सेना भी बने,  जिसकी रहे दहाड़ |
दुश्मन को ऐसा लगे, सम्मुख खड़ा पहाड़ ||34🙄

नकली मूँछों से अभी  , मुच्छड़ बना  सुभाष |
आगे असली अब रखूँ  ,आया  हृदय  प्रकाश ||😄🙏35

©®सुभाष सिंघई

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